पावन धाम का परिचय
श्री राजा बलि धाम सनातन आस्था, भक्ति और जन-कल्याण का एक पावन केंद्र है।
राजा बली धाम में श्रद्धालु अपनी विभिन्न प्रकार की समस्याओं के समाधान हेतु आते हैं। आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक तथा अन्य कठिनाइयों के साथ-साथ संतान प्राप्ति में बाधा, रोजगार न मिलना, व्यवसाय में हानि या बंद हो जाना जैसी समस्याओं से पीड़ित लोग भी यहाँ मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।
महाराज जी को राजा बली का आशीर्वाद एवं विशेष शक्ति प्राप्त है, दृष्टिपात के माध्यम से वे लोगों को समस्याओं का समाधान होता हैं। नए भक्तों को उनकी स्थिति के अनुसार कुछ नियम, मान्यता (चढ़ावा) बताए जाते हैं। महाराज जी द्वारा बताए गए नियमों का नियमित पालन करने से उनकी समस्याओं का समाधान 1 से 2 वर्ष के भीतर हो जाता है और उनके जीवन में सुख, शांति एवं सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
पंजीकृत संस्था
यह धाम एक पंजीकृत संस्था (Registered Organization) द्वारा संचालित है, जो सेवा, सहयोग और जनजागरण के कार्यों में सक्रिय रूप से कार्यरत है।
संस्था को आयकर विभाग द्वारा 12A एवं 80G की मान्यता प्राप्त है। 12A प्रमाणन संस्था को एक गैर-लाभकारी (Non-Profit) संगठन के रूप में मान्यता प्रदान करता है, जबकि 80G प्रमाणन के अंतर्गत संस्था को दिए गए दान पर दानदाताओं को आयकर अधिनियम के अनुसार कर छूट का लाभ प्राप्त हो सकता है। इससे संस्था की पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय मिलता है।
"दाता बलि की महिमा न्यारी, वामन रूप धर आए बनवारी।
तीन पग भूमि में नाप दिया जग सारा, धन्य हुआ बलि का यह जन्म हमारा॥"
आध्यात्मिक महत्त्व
श्री राजा बलि धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह परोपकार, सत्य और पूर्ण आत्मसमर्पण का जीवंत प्रतीक है। पुराणों के अनुसार, दानवीर राजा बलि ने जब अपना सर्वस्व भगवान वामन के चरणों में अर्पित कर दिया, तब भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया और स्वयं उनके द्वारपाल बने। यह धाम उस अनंत भक्ति का स्मरण कराता है जहाँ भक्त ने अपने अहंकार को मिटाकर ईश्वर को अपना रक्षक बना लिया।
यहाँ की मिट्टी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु यहाँ निष्काम भाव से प्रार्थना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
मुख्य गर्भगृह और विग्रह
धाम के मुख्य मंदिर में भगवान विष्णु के बाल रूप वामन अवतार और महादानी राजा बलि की अत्यंत मनमोहक प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह में स्थापित यह प्रतिमा अद्भुत है, जिसमें भगवान वामन अपना तीसरा पग राजा बलि के मस्तक पर रखने जा रहे हैं और राजा बलि अत्यंत श्रद्धा और विनय से अपना शीश झुकाए हुए हैं। विग्रह के दर्शन मात्र से भक्तों की आँखों में अश्रुधारा बहने लगती है और मन शांत हो जाता है।
गर्भगृह की बनावट इस प्रकार की गई है कि प्रातःकाल सूर्य की पहली किरण सीधे विग्रह के चरणों को स्पर्श करती है, जिससे पूरा वातावरण ज्योतिर्मय हो उठता है।